गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

English Essay

My Sister 
I have a lovely young sister. Her name is Rita. She is about ten. She is slim and tall. She is good looking also. She wakes up before six o'clock. She helps our mother with her work up before six o'clock. She read her lesson also. She does her homework. After breakfast she leaves for school at nine. She loves. (72 Words) 

My Friend 
Govind is my good friend. He loves me too much. He is of good nature and character. He is man of word. He makes few promises and keeps them, He always speaks the truth. He never speaks evil of anyone. He never plays a game of chances. He believes that good character is above all things in the world. He does not indulge in bad habits. He advises me not to marry until I will be able to support a wife. He advises me also to adopt good habits. He says to me. "If anyone speaks evil of you let his life be as such that no one will believe him." He know that idleness is the root of all evils. So, be employed usefully attend to the cultivation of your hands cannot avoids temptation, running into debt, hesitation and other demerits. In this way. I find in him so many qualities. When he retires to bed, he thanks over what he has been doing during the day, I like Govind much. He is my ideal friend. 

My School 
I read is class VII at Gyan Sarovar Public School, Karrakh, Teknachauk (Samastipur) Bihar. It is 10+2 school. Every year this school receives Gold Medal for excellent results in Class X and Class XII . Our Principal is a retired Army. Under his guidance the students are disciplined and dutiful. There is a big field in front of this school there is a well-furnished science subjects. This school is a Bihar Board School. On the ground of its results we may say that this is an ideal school of the town. 

My Dally Life 
I am Amit Kumar. I get up by 5 in the morning. I get ready by 5:30 a.m. Then I sit down for study. I do homework till 7:30 a.m. Then I have a bath. After breakfast I complete my homework. Get ready for school. I have for school at 9 o'clock. I carefully attend my classes. I return home by 4:30 p.m. I play football with my school friends. I come back home by six o'clock. I take tea with our friends. Then I red my school books. By 9 p.m. to bed after dinner.

मंच सम्बोधन 

सब से पहले हम इहाँ आइल सभे  माई-बहिन आ  भाई -बंधू  के हाथ जोर के प्रणाम करतानी।  आज बरी ख़ुशी के बात की हमके यहां कुछ बोले/गावे  के मौका मिलल बा,  सबसे पहले हम उनका धन्यवाद दे तानी जे हमके एतना बर  जगह/मंच  पर कुछ बोले के मौका देले बारन।  रउवा लोगन से विनती करतानी की ई चाँद शब्द  में हमनी  कउनो गलती होइ त आपन नादान लइका समझ के छमा करेम। 

 सोसल मिडिया सम्बोधन 

नमस्कार प्रणाम हम ,,,,,,,,,,,,,, कुमार ,  रउवा सबके दिल से धन्यवाद दे तानी की हमके इतना उचाई पर पहुँच देलेवानी। हम रउवा लोगन के आभारी वाणी बस असहि ई छोट बेटा पर प्यार दुलाड़ उतावत रही।  हमर एगो नया गीत /फिलम आ रहल बा   .......   हम चाहा तानी  की जे तरह हमरा सब गीत / फिलम के ढेर सारा प्यार दुलार  देलेवानी बस  ओसही हमर ई फिलम/ गीत के भी ढेर सारा प्यार दुलार मिली। धन्यवाद।  

दुर्गा पूजा व दशहरा (विजया दशमी ) 

Sera wali mata

सब से पहले हम इहाँ आइल सभे  माई-बहिन आ  भाई -बंधू  के हाथ जोर के प्रणाम करतानी।  आज बरी ख़ुशी के बात की हमके यहां कुछ बोले/गावे  के मौका मिलल बा,  सबसे पहले हम उनका धन्यवाद दे तानी जे हमके एतना बर  जगह/मंच  पर कुछ बोले के मौका देले बारन।  रउवा लोगन से विनती करतानी की ई चाँद शब्द  में हमनी  कउनो गलती होइ त आपन नादान लइका समझ के छमा करेम। 

आपन हिन्दू लोगन में बहुते पर्व-त्वयाहर बा।  जेकर  कबनों ने कबनों रूप में बहुते महत्त्व बा, कहे की सब पर्व आ तेव्हार से हमनी के  नया जीवन के साथ-साथ बहुते सारा आनन्दो  प्राप्त होखेला ।  हम एकरा से प्रेम आ भाई चार के भाबना भी करिले आ आपन जीवन के प्रगति पथ पर आगे बढाबिले।  ई पबनी त्यौहार से हम सच्चाई, आदर्श आ नैतकता सीखतानी।  ई पावन-त्यौहार हमर अतीत के गौरब आ ओकर मोल के जागरण  देवेला।  ई से हम धन्य आ कृतज्ञ होखिले।  हम हिन्दू के पवित्र पावैन में होली,रक्षाबंधन, दीवाली के नियर दसहरो के भी एक महान पावैन के दर्जा देहल गइल बा।  एकरा के सभे हिन्दू बड़ा ही उत्साह आ उल्लास के साथ मानबेला। एकरा के विजयदश्मियो कहल जला।
shera wali mata

                दसहरा मानबे के कारन ई बा की ऍह दिन महँ पराक्रमी आ मर्यादा परुषोत्तम श्री राम जी महा प्रतापी राजा लंका नरेश के मार्ले/हरवले  रहे मने राबन के अंत क के लंका पर विजय प्राप्त कबले कबले  रहलन।
इहे ख़ुशी में ई पावन के हरेक साल आसीन महीना के शुक्ल पक्ष दसमी में बारे धूम  मनोबल जला।  दसहरा के ई त्यौहार मानबे के पीछे किछो औरो कारन भी देखे के मिलेला।
               बंगाल में यानि उत्तर पूरबी भारत में भारत  के जइसन श्री राम के यद् में    उ लोगन दसहरा नहीं मानबेला ।  वोहा शक्ति -शाली  माता दुर्गा के सम्मान आ श्रद्धा हेतु  ई पावैन के मनोबल जाला।
उ लोगन के ई मनसा बा की इहे दिन माता दुर्गा कैलाश  पर्वत के एम्हर  गइल रहली।
इहे खातिर लोग मई दुर्गा के याद में रत भर पूजू , उपासना आ अखंड जाप करेलन।  नौरात्रि आवे तक लोग मई के मूर्ति के खुबसुरा ढंग से सजा धजा के रखलन आ भजन कीर्तन करेला।
dasahara
                ई त दसहरा के पावैन त राम राबन के यूद्ध से ही जुरैल बा।  एकरा के पर्दर्सित करे के खातिर रामलीला के आयोजन कइल जला।  आ दसमी के दिन राम राबन के परस्पर यूद्ध के दिखाबल जला।  ई लीला के देख के जहाँ भक्त  जन के भक्ति - भावना- भावना उत्पन होखेला, उहे उ दुष्ट  प्रति क्रोध भी जागेला।
                ई पावैन के दिन पूरा गांव जवार में हलचल  मचल रहेला।  गजर में मेला के दृश्य दिखयी देवेला।  मातवर  गरीब लोग आपन -आपन छमता के अनुसार खरीददारी करेलन।  लइका बच्चा ई में सबसे अधिक खुश रहेलन आ बहुते आनंद लेबेला।  ई पाबैन हमर सभ्यता आ संस्कृति के प्रतीक बा।  हमनी के आपन सभ्यता संस्कृति के जिन्दा रखे के खातिर एकरा के धूम धाम से मानबे के चाही।  ी से  प्राचीन सभ्यता आ बिचार धरा कायम रहेला। तभिये त हमर आवे वाला पीढ़ी एकरा के मानबे में हिचकिचे नाही।
               अब हम अतनाही शब्द कहके आपन बानी के विराम दे तानी धन्यवाद
Happy Dasahara


   हमारे समाज  में का  स्थान   भारतीय नारी  


सब से पहले हम इहाँ आइल सभे  माई-बहिन आ  भाई -बंधू  के हाथ जोर के प्रणाम करतानी।  आज बरी ख़ुशी के बात की हमके यहां कुछ बोले/गावे  के मौका मिलल बा,  सबसे पहले हम उनका धन्यवाद दे तानी जे हमके एतना बर  जगह/मंच  पर कुछ बोले के मौका देले बारन।  रउवा लोगन से विनती करतानी की ई चाँद शब्द  में हमनी  कउनो गलती होइ त आपन नादान लइका समझ के छमा करेम। 


पहले के समय में हेमर समाज मर्द से बसै औरत से मंत रहे।  एगो अइसन समय रहल रहे की बाबू जी के नाम के बदले लोग माई के ही नाम से जानल जात रहे।  धर्म द्रष्टा मनु नारी के पूजनीय आ श्रद्धामई मानले आ पर्दर्सित कइले बारन।           

 'यत्रनार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवताः।

 'माने जहाँ नारी  पूजा होखेला , उहाँ देवता रमन करेलन,  अर्थात निवास करेलन।  लाहे-लाहे लामय के आर के चलते नारी दसा में ढेर अपूर्ण परिवर्तन भइलबा।  उ आब नर में न रहके उनका समकक्ष श्रेणी में आ गइल।  यदि पुरुष आपन घर परिवार के दायित्व सम्हाल लेलेबा त घर के सारा कार्य के बोझ नारी उठाबे का सुरु कर देले बा।  इहे कारन बस नर आ नारी में काफी अंतर आ गइल बा।    अइसन होब्ला के बाद भी प्राचीन कल के नारी हिन् भाबना के प्रत्याग कइके स्वतंत्र आ आस्वस्त भई के आपन व्यकित्व के  सुन्दर और आकर्षक निर्माण कइलेवा।  पंडित मिश्रा के मेहरारू द्वारा शंकराचार्य जी के परास्त होखे के साथ-साथ गार्गी, मैत्रयी, विधओमता आदि विदुषयो के नाम इहे श्रेणी में उल्लेखनीय बाटे। 

              समय के बदलाब के साथ - साथ अब नारी-दशा में बहुते परिबर्तन हो गइल बा।  यो ते नारी प्राचीन कल से अब तक भार्या के रूप में रहले बरी।  एकरा खातिर उ गृहतः काज खातिर बिबस कइल गइल।  जैसे - भोजन बनाबल , लइका बच्चा के देखभाल कइल, आपन पिया के सेवा कइल  आदि।  पिया के भूख के शांत करे खातिर विवश भइल अमानवता के शिकार बनके क्रय विक्रय के बस्तु भी बनल एंकर जीवन के विशेष अंग बन गइल रहे।  


                क्षिक्षा के प्रचार प्रसार के फलस्वरप अब नारी के उ दुर्दशा नइखे।  जे की अंधविस्वाशीयो, अज्ञान विचारधार  फलस्वरूप  रहे।  नारी के नर के सामानांतर  में लाबे  के खातिर समाज के चिंतक लोग ई दिशा में सोचल सुरु कर देले बरन।  


               Thank You


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