Good Thoughts
* कठोर वाणी आग के जलने से भी अधिक दुखदाई होता है।
* मनुष्य के वृद्धि और बिनाश उसके हाथों में होता है।
* शरीर के रोग सत्रुओं से भी अधिक दुख दाई होता है।
* सदाचार द्वारा है सत्रूओं पर विजय प्राप्त किया का सकता है।
* धर्म की रक्षा मानव को विश्व विजेता बना देता है।
* दूसरे की धन, संपप्ती, वैभव की लिप्सा नाश का कारण है।
* एक गुणवान पुत्र से पूरा परिवार स्वर्ग बन जाता है।
* शत्रु की भी आजीविका नष्ट नहीं करनी चाहिए।
* बिना किसी कारण किसी दूसरे के घर नहीं जाना चाहिए।
* ज्ञानी पुरुषों को संसार में किसी प्रकार का भय नहीं होता है
* इस संसार का कोई भी तप सत्य से बढ़ कर नहीं है।
* अपने पुत्र की प्रशंसा स्वप्न में भी नहीं करनी चाहिए।
* ज्यों - ज्यों अभिमान कम होता है किर्ती बढ़ती है।
* अहंकारी व्यक्ति में किर्त्यज्ञता बहुत कम होता है, क्योंकि वह यही समझता है कि मैं जितना पाने योग्य हम उतना मुझे कभी नहीं मिल सकता।
* किसी की अनुग्रह की याचना करना अपनी आजादी बेचना है।
* अवसर बुद्धिमान के पक्ष में लड़ता है।
* इष्या अपनी ही हीनता का बोध से जन्म लेता है और उस हीनता को दूर नहीं करती है सिर्फ दवती है।
* विश्वास करना एक गुण है अविश्वास दुर्बलता को जननी।
* धानी मूर्ख उस सुवार के समान होता है जो अपनी चर्बी से घुट कर मारता है।
* तुम वह क्यों कहते जो तुम नहीं करते।
* प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को उन्नतिशील बने रहना पड़ता है।
* अतीत की चिंता मत करो उसे भूल जाओ, बीती हुई बातों में चिंता से सुधार नहीं हो सकती।
* पड़ोसी से प्रेम करने वाला विपत्ति में भी सुखी रहता है। जब की पड़ोसी से बैर करने वाला विपत्ति में भी दुखी रहता है।
* जो अपने को सबसे बड़ा बुद्धिमान समझता है वो सामान्यतः बड़ा मूर्ख होता है।
* जो यत्न करता है उससे भूलें भी होती है।
* सबसे बड़ा धनवान वो है जो निर्धनों का दुख हरता है। और सबसे बड़ा फकीर वो है जो अपने निर्वाह के लिए धनवानों का मुख नहीं देखता।
* यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर एक भूल उसे कुछ ना कुछ शिक्षा जरूर दे सकती है।
* सदा अभय रहने वाले वायक्ती को कभी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
* अंधा वो नहीं जो देख नहीं सकता अंधा वो है जो देख कर भी अपने दोषों पर परदा डालने का प्रयास करता है।
* यह भी हो सकता है गरीबी पुण्य का फल हो और अमीरी पाप का।
* अपनी भूख सहने वाले तपस्वी की शक्तति उतनी नहीं जितनी दूसरो की भूख मिटाने वालों की शक्ति होती है।
* कम आहार और कम संभाषण कभी क्षति नहीं पहुंचती।
* कठोर वाणी आग के जलने से भी अधिक दुखदाई होता है।
* मनुष्य के वृद्धि और बिनाश उसके हाथों में होता है।
* शरीर के रोग सत्रुओं से भी अधिक दुख दाई होता है।
* सदाचार द्वारा है सत्रूओं पर विजय प्राप्त किया का सकता है।
* धर्म की रक्षा मानव को विश्व विजेता बना देता है।
* दूसरे की धन, संपप्ती, वैभव की लिप्सा नाश का कारण है।
* एक गुणवान पुत्र से पूरा परिवार स्वर्ग बन जाता है।
* शत्रु की भी आजीविका नष्ट नहीं करनी चाहिए।
* बिना किसी कारण किसी दूसरे के घर नहीं जाना चाहिए।
* ज्ञानी पुरुषों को संसार में किसी प्रकार का भय नहीं होता है
* इस संसार का कोई भी तप सत्य से बढ़ कर नहीं है।
* अपने पुत्र की प्रशंसा स्वप्न में भी नहीं करनी चाहिए।
* ज्यों - ज्यों अभिमान कम होता है किर्ती बढ़ती है।
* अहंकारी व्यक्ति में किर्त्यज्ञता बहुत कम होता है, क्योंकि वह यही समझता है कि मैं जितना पाने योग्य हम उतना मुझे कभी नहीं मिल सकता।
* किसी की अनुग्रह की याचना करना अपनी आजादी बेचना है।
* अवसर बुद्धिमान के पक्ष में लड़ता है।
* इष्या अपनी ही हीनता का बोध से जन्म लेता है और उस हीनता को दूर नहीं करती है सिर्फ दवती है।
* विश्वास करना एक गुण है अविश्वास दुर्बलता को जननी।
* धानी मूर्ख उस सुवार के समान होता है जो अपनी चर्बी से घुट कर मारता है।
* तुम वह क्यों कहते जो तुम नहीं करते।
* प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को उन्नतिशील बने रहना पड़ता है।
* अतीत की चिंता मत करो उसे भूल जाओ, बीती हुई बातों में चिंता से सुधार नहीं हो सकती।
* पड़ोसी से प्रेम करने वाला विपत्ति में भी सुखी रहता है। जब की पड़ोसी से बैर करने वाला विपत्ति में भी दुखी रहता है।
* जो अपने को सबसे बड़ा बुद्धिमान समझता है वो सामान्यतः बड़ा मूर्ख होता है।
* जो यत्न करता है उससे भूलें भी होती है।
* सबसे बड़ा धनवान वो है जो निर्धनों का दुख हरता है। और सबसे बड़ा फकीर वो है जो अपने निर्वाह के लिए धनवानों का मुख नहीं देखता।
* यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर एक भूल उसे कुछ ना कुछ शिक्षा जरूर दे सकती है।
* सदा अभय रहने वाले वायक्ती को कभी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
* अंधा वो नहीं जो देख नहीं सकता अंधा वो है जो देख कर भी अपने दोषों पर परदा डालने का प्रयास करता है।
* यह भी हो सकता है गरीबी पुण्य का फल हो और अमीरी पाप का।
* अपनी भूख सहने वाले तपस्वी की शक्तति उतनी नहीं जितनी दूसरो की भूख मिटाने वालों की शक्ति होती है।
* कम आहार और कम संभाषण कभी क्षति नहीं पहुंचती।
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